
फतेहाबाद15 जुलाई- पुलिस विभाग द्वारा पुलिस कर्मियों को मिलने वाली वर्दी, जूतों, जुराब व बरसाती के घटिया स्तर को लेकर पुलिस कर्मियों में रोष व्याप्त है।
पुलिस विभाग के एम.एन.डब्ल्यू विभाग द्वारा पुलिस कर्मियों को पहले तो समय पर वर्दी-जूते आदि मिलते ही नहीं है। यदि मिलते हैं तो काफी घटिया स्तर के होते हैं। पुलिस कर्मियों को वर्ष में एक बार वर्दी व जूते, बरसाती आदि मिलते हैं। पुलिस कर्मियों को मिलने वाला गर्म व ठण्डा कपड़ा इतना हल्के स्तर का होता है कि कोई भी पुलिस कर्मी इसे सिलवाता नहीं है। वह इस कपड़े को दुकान से बदलकर नया कपड़ा लेता है। कई बार दर्जी को सिलवाई के बदले यह कपड़ा दे दिया जाता है। पुलिस कर्मियों का कहना है कि वर्ष 2003 में लखानी के अच्छे जूते आए थे। उससे पहले व बाद में कभी भी अच्छे जूते नहीं आए हैं। पुलिस कर्मियों को जूते मिलते हैं, वह इतने घटिया व बेकार डिजाइन के होते हैं कि कोई भी पुलिस कर्मी इन्हें पहनना पंसद नहीं करता।
पुलिस कर्मियों को मिलने वाली बरसाती तो तिरपाल का कवर है। जिसे पहना हुआ आपको कोई भी पुलिस कर्मी नहीं मिलेगा। पुलिस कर्मियों की सामग्री के नाम पर उच्च स्तर पर कोई घोटाला हो रहा है। ठेकेदार टैण्डर छुड़ाकर नियम के विरूद्ध सामान की सप्लाई कर रहा है। चूकिं गड़बड़ी ऊपरी स्तर पर है। इसलिए कोई भी बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। पुलिस कर्मियों ने मधुबन व चंडीगढ़ में दी जाने वाली कम्प्यूटर ट्रेनिंग पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मात्र 5 दिन की ट्रेनिग से कोई कैसे कम्प्यूटर चलाना सीख सकता है।