Thursday, July 31, 2008

परिवहन कार्यालय बना भ्रष्टाचार का गढ़

फतेहाबाद 31 जुलाई/जयगोपाल मदान- स्थानीय परिवहन कार्यालय में आज कल भ्रष्टाचार इस कदर व्याप्त है कि आदमी चाहे कहीं का रहने वाला है, किसी भी पते का निवासी हो, वह यहां कार्यरत कर्मचारियों को मात्र 1500रुपए देकर वाहन के रजिस्ट्रेशन कार्ड में फतेहाबाद के किसी वार्ड, मोहल्ले का पता इन्द्राज करके वाहन की मलकियत तब्दील करवा सकता है। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस कार्यालय में हाल ही में तब्दील होकर आए क्लर्क ने मात्र एक माह में ही बाहर के पतों की 200 से ज्यादा रजिस्टे्रशन कापियां यहां पर तब्दील कर दी हैं। जिनमें गुड़गांव, पलवल, जींद और भी कई जिलों की रजिस्ट्रेशन कापियां शामिल हैं। इन कापियों में दर्ज किया जाता है कि उक्त व्यक्ति हाल आबाद फतेहाबाद निवासी है। रजिस्ट्रेशन कापी में पता तब्दील करने के लिए अनोखी गेम खेली जाती है। रिहायशी सबूत तैयार करने के लिए एक नकली राशन कार्ड बनाया जाता है। इस काम में जुटे दलाल व कर्मचारी कोई भी राशन कार्ड लेकर पहले उसकी फोटोस्टेट करवाते हें, फिर फोटोस्टेट पर फ्लयूड लगाकर रजिस्ट्रेशन कापी में पता तब्दील करने वाले का नाम दर्ज किया जाता है और फिर पुन: उसकी फोटोस्टेट करवाकर कापी अटैस्ट करवा ली जाती है। यह कापी दस्तावेजों के साथ लगाकर व्यक्ति का पता बदल दिया जाता है। यह सारा खेल नवनियुक्त क्लर्क व ताऊ देवीलाल मार्किट में बैठे चंद दलालों के माध्यम से हो रहा है। खुदा ना करे, कल को उक्त फर्जी आरसी का वाहन मालिक अपने वाहन से एक्सीडेंट कर किसी की जान ले ले तो ऐसे वाहन मालिक को लाख सिर पटकने पर भी पकड़ा नहीं जा सकेगा क्योकिं रजिस्ट्रेशन कापी में फतेहाबाद का जो पता दिखाया जाता है, वहां पर वह व्यक्ति रहता ही नहीं है। इसका सबूत अभी हाल ही में टोहाना से ट्रांसफर होकर आई कापी से पता लगता है। जिसमें पुलिस अभी तक कापी में दिखाए एमसी कालोनी निवासी ओमप्रकाश पुत्र जुगलाल को ही ढूंढ रही है। जिस तेज गति से डीटीओ ऑफिस में यह खेल चल रहा है, उससे साफ है कि इस कार्यालय को देश में चल रही आतंकवादी गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं है। इन्हें तो सिर्फ पैसा कमाने की होड़ है। वहीं दूसरी ओर फतेहाबाद का वास्तविक निवासी अगर गलती से किसी बाहर के शहर से गाड़ी खरीद लाता है तो उसे इस कार्यालय से अपनी मलकियत तब्दील करवाने में पसीने छूट जाते हैं। उसे कहा जाता है कि पिछली रजिस्ट्रेशन शाखा से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर आओ। पहली बात तो अनापत्ति प्रमाण पत्र तो मिलता ही नहीं क्योकिं इसके लिए पिछले मालिक के असली हस्ताक्षरों की जरूरत होती है और किसी भी रजिस्ट्रेशन शाखा से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने से पहले उस शहर के थाना अध्यक्ष से भी अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना पड़ता है। यदि कोई इतनी मशक्कत के बाद एनओसी ले भी आता है तो उक्त कार्यालय के कर्मी कहते हैं कि पहले हम इसकी तस्दीक करवाएंगे कि यह असली है या नहीं। लेकिन यही खेल मात्र 1500 रुपए में बिना एनओसी, फर्जी राशन कार्ड के दम पर चुटकियों में हो जाता है। वहीं अपुष्ट सूत्रों ने बताया कि इस कार्यालय को मात्र 10 सीटों की गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन करने की अनुमति है। मगर जिला परिवहन कार्यालय 14 सीट की लैंड क्रूजनर गाड़ियों की रजिस्टे्रशन भी कर रहा है। यदि इस कार्यालय के पुराने रिकार्ड की जांच की जाए तो साफ हो जाएगा कि कितने आपराधिक किस्म के लोगों ने मात्र 1500-1500रुपए देकर कानून व नियमों के साथ किस तरह से खिलवाड़ किया है।