Friday, July 25, 2008

सामान्य अस्पताल का निजीकरण , सब जगह ‘सैटिंग’ है




फतेहाबाद 25जुलाई/निस- सामान्य अस्पताल में आजकल दो डाक्टरों ने कमीशन के चक्कर में अस्पताल का निजीकरण कर डाला है। इन डाक्टरों के केबिन के बाहर निजी लैबोरेट्री, कैमिस्ट व अल्ट्रासाउंड के कारिंदे खड़े रहते हैं। उक्त डाक्टर मरीजों की जांच कर उन्हें इन कारिंदों के हवाले कर देते हैँ। यदि सिर्फ दवाई लेनी है तो मरीज को संजीवनी मैडिकोज पर ले जाया जाता है। यदि किसी ने कोई टैस्ट करवाया जाता है तो उसे हरियाणा लैबोरेट्री व सिरसा लैबोरेट्री में ले जाया जाता है। हालाकिं सामान्य अस्पताल में दो मैडिकल स्टोर है और कई दवाईयां मुफ्त भी मिलती है। इस तरह सामान्य अस्पताल में सस्ती दरों पर टैस्ट होते हैं मगर उन्हें बाहर लैबोरेट्री पर भेजा जाता है। पता चला है कि उक्त डाक्टरों को कुल बिल का 50फीसदी मिलता है। अस्पताल में 70 रुपए में अल्ट्रा साउंड हो जाता है मगर बाजार में मरीज से 300 रुपए वसूले जाते हैं और आधे पैसे इन डाक्टरों की जेब में जाते हैं। उक्त डाक्टर जानबूझ कर ऐसी दवाईयां लिखते हैं, जो सरकारी मेडीकल स्टोर पर उपलब्ध ही नहीं होती। हालाकिं उन दवाईयों से मिलती-जुलती दवाई स्टोर में होती है मगर सब जगह ‘सैटिंग’ है। इसलिए स्टोर से दवा नहीं मिलती और डाक्टर पर्ची कमीशन एजेंटों को पकड़ा देते हैं। डाक्टरों के कैबिन के बाहर बैठे कमीशन एजेंट मरीज को गिद्ध दृष्टि से देखते हैं। जानबूझ कर ‘प्रोपेगण्डा’ दवाईयां लिखी जा रही है। डाक्टरों को बता दिया जाता है कि उक्त दवाई का स्टाक ज्यादा पड़ा है। बस डाक्टर मोटा कमीशन लेने के चक्कर में सभी मरीजों को वह दवाई तो अवश्य लिख देता है। कुल मिलाकर सामान्य अस्पताल के दो डाक्टरों ने माहौल को ‘मछली बाजार’ बना छोड़ा है।