Wednesday, August 6, 2008

भवनों पर लगाये गये ऊंचाई के प्रतिबंध को हटाया

चंडीगढ़, 6अगस्त : हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने ग्रुप हाऊसिंग कालोनियों एवं वाणिज्यिक कालोनियों के भवनों पर लगाये गये ऊंचाई के प्रतिबंध को हटा दिया है। प्राधिकरण ने ग्रुप हाऊसिंग, समेकित एवं बहुमजिंला वाणिज्यिक भवनों तथा आई टी पार्कस एवं साइबर सिटीज में चार तलीय बेसमेंट की अनुमति प्रदान करने का भी निर्णय लिया है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक श्री टी सी गुप्ता ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि इन दोनों के लिये नीतियां तैयार कर ली गई हैं। राष्ट्रीय भवन कोड द्वारा भवनों की ऊंचाई पर प्रतिबंध हटाये जाने तथा ढांचागत डिजाइन एवं अग्निशमन के लिये उपलब्ध नवीनतम प्रौद्योगिकियों को मद्देनजर रखते हुए प्राधिकरण ने ग्रुप हाऊसिंग स्थलों, वाणिज्यिक परिसरों तथा संस्थागत स्थलों के मामले में भवनों की ऊंचाई की अधिकतम सीमा को समाप्त करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक परिसरों के मामले में यह प्रावधान केवल उन स्थलों पर लागू होगा जिनपर वास्तुकलात्मक नियन्त्रण नहीं बल्कि जोनिंग योजना लागू है। इसी प्रकार, संस्थागत स्थलों के मामले में यह प्रावधान एक एकड़ एवं इससे अधिक के क्षेत्र वाले संंस्थागत प्लाटों पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि 30 मीटर एवं इससे अधिक की ऊंचाई वाले भवनों के मामले में भारतीय राष्ट्रीय विमानपतन प्राधिकरण से स्वीकृति लेनी होगी। इसी प्रकार, 60 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों के मामले में, ढांचागत स्थिरता के सम्बन्ध में आई आई टीज, पंजाब इंजीनियरिंग कालेज, रिजनल इंजीनियरिंग कालेज तथा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जैसे मान्यता प्राप्त संस्थानों से तथा अग्नि सुरक्षा के लिये इंस्टीच्यूट आफ फायर इंजीनियरिंग, नागपुर से स्वीकृति लेना आवश्यक होगा। श्री गुप्ता ने कहा कि पार्किंग के लिये बढ़ती मांग तथा ढांचागत डिजाइन के लिये उपलब्ध नवीनतम प्रौद्योगिकियों के मद्देनजर प्राधिकरण ने साइबर सिटीज, साइबर पार्कस, आई टी पार्कस, गु्रप हाऊसिंग स्थलों, वाणिज्यिक परिसरों एवं संस्थागत प्लाटों में स्थापित ऊंचे-ऊंचे भवनों में लोगों की सुविधा के लिये पार्किंग हेतु चार तलीय बेसमेंट बनाने की अनुमति प्रदान करने का भी निर्णय लिया है। प्रत्येक श्रेणी के भवनों की पार्किंग को संशोधित किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रुप हाऊसिंग में प्रत्येक मकान के लिये कार पार्किंग हेतु एक कार जितनी जगह (ई सी एस) लेती है उससे डयोढ़ी जगह उपलब्ध करवाना आवश्यक होगा, जबकि पहले एक कार जितना स्थान घेरती है उतना ही स्थान पार्किंग के लिये उपलब्ध करवाया जाता था। इसके अतिरिक्त, कुल कार पार्किंग स्थल में कम से कम 75 प्रतिशत आवृत्त पार्किंग के रूप में उपलब्ध हो। समेकित एवं बहुमजिंला वाणिज्यिक भवनों के मामले में अब आवृत्त क्षेत्र के 75 वर्ग मीटर की बजाय प्रत्येक 50 वर्गमीटर के लिये एक कार की जगह उपलब्ध करवानी होगी। उन्होंने कहा कि कुल पार्किंग क्षेत्र का 15 प्रतिशत सतही तल पर तथा शेष 85 प्रतिशत आवृत्त पार्किंग के रूप में उपलब्ध करवाना होगा। इसी प्रकार, साइबर पार्कस, आई टी पार्कस एवं साइबर सिटीज में आवृत्त क्षेत्र के प्रत्येक 50 वर्ग मीटर के लिये एक कार की जगह उपलब्ध करवानी होगी। उन्होंने कहा कि बेसमेंट या भू-तल से ऊपर बहुतलीय पार्किंग के रूप में आवृत्त पार्किंग की गणना फ्लोर एरिया अनुपात में नहीं की जायेगी। बहरहाल, अलग से पार्किंग भवन खण्डों के फुटप्रिंट को ग्राऊंड कवरेज माना जायेगा। बेसमेंट तथा ऊपरी मजिंलों में मकैनिकल पार्किंग के प्रावधान के मामले में बेसमेंट या फ्लोर की अधिकतम ऊंचाई 4.5 मीटर होगी। मुख्य प्रशासक ने कहा कि आवृत्त पार्किंग स्थल के दुरूपयोग के मामले में सम्बन्धित श्रेणी में अतिरिक्त आवृत्त क्षेत्र के लिये निर्धारित की गई संघटन फीस से तीन गुणा जुर्माना लगाया जायेगा। बेसमेंट का उपयोग भवन तथा पार्किंग स्थलों से जुड़ी आवश्यकताओं एवं सेवाओं तथा एयर कंडीशनिंग हैंडलिंग इकाई के लिये किया जा सकता है। पार्किंग क्षेत्र में भण्डारण या वाणिज्यिक गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। यदि बेसमेंट के एक भाग का उपयोग जनरेटर कक्ष, इलैक्ट्रिक सब-स्टेशन तथा ट्रांसफार्मर कक्ष के रूप में किया जा रहा है तो उसे साढ़े चार इंच चौडी ईंट की दीवार बनाकर बेसमेंट के शेष हिस्से से अलग करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये दिशा-निर्देश शीघ्र ही लागू हो जायेंगे। बहरहाल, पहले बिक चुके स्थलों पर ऐसे स्थलों के लिये स्वीकृत जोनिंग योजना के प्रावधान ही लागू होंगे।