Monday, September 29, 2008
का. पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया नही रहे
फतेहाबाद 29 सितम्बर/निस- बरसों से गरीब-मजदूर-किसानों व अन्याय के विरूद्ध लड़ाई लड़ते रहे का. पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया आज हमारे बीच नहीं रहे। 62 वषीüय श्री गोरखपुरिया ने आज लम्बी बीमारी के बाद एम्ज में दोपहर पौने दो बजे अंतिम सांस ली। वे अपने पीछे पत्नी, मां, दो बेटे, दो बेटियां व भरा-पूरा माकपा परिवार छोड़ कर गए हैं। छात्र राजनीति से माकपा के रा’य सचिव मंडल तक पहुंचे का. पृथ्वीसिंह प्रदेश में माकपा के संस्थापक सदस्य के रूप में जाने जाते है। उन्होंने डबल एम.ए. किया मगर रोजगार को मौलिक अधिकार बनाने की मांग को लेकर कुरूक्षेत्र में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल के सामने अपनी डिगि्रयां फाड़ कर काफी चर्चा बटोरी। आपातकाल के दौरान वे 19 माह तक जेल में रहे। वर्ष 1972 में उन्होंने बडोपल से, 1977 में ताऊ देवीलाल के सामने भट्टू से तथा 1987, 91 व 96 में उन्होंने फतेहाबाद से चुनाव लड़ा। वे हमेशा कहते थे कि `सत्ता में पहुंचना ही बड़ी बात नहीं है, विपक्ष को मिले वोट भी अपना महत्व रखते हैं।´ पार्टी जिला कमेटी की तरफ से आज का. रामकुमार बहबलपुरिया के नेतृत्व में मौन रखकर उन्हें श्रद्धाजंलि दी गई। श्री गोरखपुरिया का अंतिम संस्कार कल सुबह 12 बजे गांव गोरखपुर में होगा।