करनाल 04 सितम्बर/साभार
-`ना-ना करते प्यार, उसी से कर बैठे´ गीत की तर्ज पर भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार हरियाणा में गठजोड़ का मन बना लिया है। माना जा रहा है कि भाजपा की पहली पंसद हरियाणा जनहित कांग्रेस है और दोनों दलों के बीच अंतिम दौर मे पहुंच चुकी वार्ता अगर सिरे चढ़ी तो लोकसभा में दोनों के बीच 8:2 के अनुपात में समझौता तो होगा ही, साथ ही विधानसभा में सत्ता में आने पर अढ़ाई-अढ़ाई साल सत्तासुख भोगने की व्यवस्था भी की जाएगी। सूत्रो से प्राप्त जानकारी देते हुए भाजपा के कुछ केंद्रीय और प्रदेश स्तरीय नेताओं की टोली हालांकि अभी भी इंडियन नैशनल के साथ चुनावी तालमेल के पक्ष में है लेकिन पार्टी की प्रदेश इकाई के अधिकांश पदाधिकारियों द्वारा हजकां के पक्ष में वीटो करने और बिश्नोई कैम्प की जोरदार ऑफर के बाद भाजपा का इनैलो समर्थक धड़ा पिछड़ गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बिश्नोई कैम्प ने भाजपा से लोकसभा की यद्यपि तीन सीटें मांगी थी लेकिन दोनों दलों के बीच सौदा 8:2 के अनुपात में होने की उम्मीद बन रही है। बताया जा रहा है कि हजकां की निगाह प्रदेश की गुड़गांव, हिसार और कुरूक्षेत्र लोकसभा सीटों पर हैं और बिश्नोई कैम्प ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को इस बात के संकेत भी दे दिए हैं कि राष्ट्रहित और प्रदेश हित में वह कुरूक्षेत्र सीट का त्याग भी कर सकते हैं। भाजपाई सूत्रों ने दोनों दलों के बीच गठजोड़ के लिए चल रहे प्रयासों की पुष्टि करते हुए बताया कि इस मामले को लेकर भाजपा की दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक हो चुकी है। प्राप्त जानकारीके अनुसार दोनों दलों में बन रही सहमति के अनुसार विधानसभा की 90 सीटों में से दोनों दल 45-45 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और सत्ता में आने पर जम्मू कश्मीर की तर्ज पर दोनों दलों की अढ़ाई-अढ़ाई साल तक अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिलेगा। सूत्र इस बात का संकेत भी दे रहे हैं कि शायद बिश्नोइ कैम्प अपने खाते में आने वाली लोकसभा की दो सीटें कमल (भाजपा) के निशान पर लड़ने का मन बना सकता है। भाजपाईयों का कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो इसका लाभ भी भाजपा को ही होगा और भविष्य में हजकां कोटे के सांसदों द्वारा दलबदल किए जाने की आशंका भी समाप्त हो जाएगी।