
चंडीगढ़ 03 सितम्बर/निस
हरियाणा विधान सभा सत्र के आखिरी दिन भी आज सत्ता पक्ष और इनैलो में जमकर नोंक-झोंक हुई। सत्र का शुभारंभ होते ही सत्ता पक्ष ने इनैलो सुप्रीमो चौटाला को प्रताडि़त करने संबंधी प्रस्ताव पर जयों ही चर्चा शुरू की, इनैलो विधायक सुशील इंदौरा ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार किसी मुद्दे पर स्पैशल रिपोर्ट नहीं ला सकती। वह या तो प्राथमिक रिपोर्ट ला सकती है या फाइनल रिपोर्ट ला सकती है। मगर सिंचाई मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव ने जब पूर्व मुख्यमंत्री चौटाला पर भ्रष्टाचार के आरोप जड़े तो डा. सुशील इंदौरा ने कैप्टन यादव पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उनका परिवार तो भ्रष्टाचार के मामले में आजकल अखबार की सुर्खिया बना हुआ है। वह किस तरह दूसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा सकते हैं इस बात पर दोनों पक्षों में काफी तू-तड़ाक हो गई। इस पर स्पीकर ने सुशील इंदौरा को `नेम´ कर सदन से बाहर निकाल दिया, मगर इनैलो विधायकों ने विरोध जारी रखा। इस पर स्पीकर ने इनैलो विधायक बलवंत सिंह सढौरा, रामफल चिडाना, शहीदांखान व ईश्वर पलाका को भी `नेम´ कर सदन से बाहर भेज दिया। इतने सदस्यों को बाहर निकालने से खफा बाकी बचे इनैलो विधायक सीता राम व ज्ञानचंद ओड भी वॉक आउट कर गए। सीता राम ने आज प्रदेश में फैले मलेरिया व डेंगू पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी रखा। वहीं सुशील इंदौरा ने रतिया में घग्घर नदी पर बने पुल टूट जाने का मुद्दा उठाया। बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुशील इंदौरा ने सरकार पर जमकर प्रहार किए। उन्होंने कहा कि यह प्रोपर्टी डीलरों की सरकार है। इस सरकार ने नामी प्रापेर्टी डीलरों के लिए तो कानून बना दिया है, मगर बेनामी प्रोपर्टी डीलरों के विरूद्ध क्या कानून है? सरकार सदन में तानाशाही रवैया रखे हुए हैं। डा. इंदौरा ने कहा कि हरियाणा के लोगों से गलती हुई है कि उन्होंने कांग्रेस को पूर्ण बहुमत दे दिया है। जनता की इस गलती का हुड्डा सरकार जमकर फायदा उठा रही है। यमुनानगर में कल हुई हिंसा पर डा. इंदौरा ने कहा कि कांग्रेस सरकार साम्प्रदायिकता फैलाने मेंकोई कसर नहीं छोड़ रही है। जब उपायुक्त ही लोगों को थप्पड़ मारने लगंेगे तो लोकतंत्र की कल्पना करना मुश्किल है।