Wednesday, May 13, 2009

डी ऐ वी की काजल छाई

फतेहाबाद/मुकेश नारंग

स्थानीय डीएवी स्कूल की 11वीं कक्षा की छात्रा काजल कासवान ने स्वरचित कविता प्रतियोगिता में राज्य स्तर पर पुरस्कार प्राप्त करके विद्यालय का नाम रोशन किया है। स्कूल प्राचार्य सुनीता मदान ने बधाई देते हुए बताया कि यह प्रतियोगिता हरियाणा राजय साहित्य अकादमी के तत्वाधान में पानीपत में आयोजित की गई थी। जिसमें स्कूल की छात्रा काजल ने भ्रूण हत्या पर आधारित बेटी की दास्ता नामक स्वरचित कविता सुना कर यह ईनाम प्राप्त किया। प्राचार्य ने इस उपलब्धी पर छात्रा व उसके अभिभावकों को बधाई दी है।

Sunday, November 16, 2008

१ अपनी कंपनी को जाने।

२ उत्पाद पर विश्वास करें और जूनून रखें।

३ मुझे कितना पैसा मिलेगा?

४ आप ख़ुद अपने बॉस हैं।

५ कामों की सूचि बनायें।

६ अपने जीवन साथी को बिज़नस मैं शामिल करें।

७ फ़ोन का इस्तेमाल करते हुए सामने एक आइना रख लें ।

८ लोगों की पहुँच में रहें।

९ दूसरो की सफलता में अपनी सफलता बनायें।

१० बिज़नस कार्ड का प्रयोग करें। किसी का बिज़नस कार्ड लेते हुए उसके कार्ड को सम्मान दे।

असफलता के कारण

१ लिखित लक्ष्य न होना । वह नहीं जानता की वह जिन्दगी से क्या चाहता है

२ कोई दिशा, भविष्य दृष्टि या सपना नहीं। दुविधाग्रस्त और खोया हुआ।

३ बिज़नस के प्रति कोई गंभीर समर्पण नहीं। इसलिए वह गंभीरता से काम भी नहीं करता है।

४ बहुत जल्दी हार मान मान लेता है। आम तौर पर पहले १०० दिन में ही हार जाता है।

५ आलसी। बिना परिश्रम किए अपने टीम की परिश्रम के पुरुस्कार पाना चाहता है।

६ हर दिन काम नहीं करता।

७ up-लाइन की आमदनी के प्रति द्वेष। काम करना इसलिए बंद कर देता है ताकि उसके up-line को उसकी सफलता पर बोनुस न मिले। यह आतम पराजयवादी नजरिया है।

Thursday, October 16, 2008

नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी व प्रधान के विरूद्ध धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने के aadesh

फतेहाबाद 16 अक्तूबर/मुकेश नारंग- आज सुबह तहसील हुडा में एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा अपनी बेटी का गलत डोमीसाइल बनवाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। तहसीलदार ज्ञानप्रकाश की तत्परता के चलते उक्त अधिकारी फर्जी डोमीसाइल बनवाते पकड़ा गया है। मिली जानकारी के अनुसार हिजरावां खुर्द निवासी हुडा का एसडीओ अपनी विवाहित बेटी बिमला का डोमीसाइल बनवाने आया था। उक्त अधिकारी ने संबंधित दस्तावेजों में अपनी बेटी को अविवाहित बताते हुए उसका पता हिजरावा खुर्द बताया। दस्तावेजो में नंबरदार की रिपोर्ट व हल्फया बयान भी शामिल थे। तहसीलदार ज्ञानप्रकाश ने बताया कि जब उन्होंने दस्तावेजों में अधिकारी की बेटी का फोटो देखा तो उन्हें कुछ शक हुआ। शक के आधार पर जब उन्होंने छानबीन की तो पता चला कि नंबरदार की रिपोर्ट अधिकारी ने अपने आप ही बना दी है। इसके साथ-साथ बात भी सामने आई कि अधिकारी की बेटी बिमला अविवाहित न होकर यमुनानगर में विवाहित है। समाचार लिखे जाने तक तहसील के अधिकारी जांच कर रहे थे।

Monday, September 29, 2008

पंजाबी बिरादरी की एकता का शंखनाद







कुरूक्षेत्र/फतेहाबाद 29 सितम्बर/निस- अखिल भारतीय पंचनद समिति के बैनर तले कुरूक्षेत्र में कल पंजाबी बिरादरी की एकता का शंखनाद हो गया। समिति के अध्यक्ष अश्वनी चोपड़ा के नेतृत्व व संत समाज के आशीर्वाद से बंटवारे के समय शहीद हुए निर्दोष दस लाख पंजाबियों को नम आंखों से श्रद्धाजंलि दी गई। श्रद्धाजंलि सभा में उमड़ी हजारों की भीड़ को संबोधित करते हुए अश्वनी चोपड़ा ने देश व प्रदेश के पंजाबियों को एकजुट होने का आह्वान किया। उन्हांेने कहा कि अगर संगठन मजबूत होगा तो सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक तरक्की से हमें कोई नहीं रोक सकेगा। इस सम्मेलन को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना, स्वामी धर्मदेव, उद्योग मंत्री लक्ष्मण दास अरोड़ा, विधायक अमीर चंद मक्कड़ सहित अनेक पंजाबी दिग्गजों ने संबोधित किया। फतेहाबाद जिले से सर्वाधिक संख्या में ढोल की थाप पर थिरकते हुए सैंकड़ों पंजाबियों के पंडाल में पहुंचने पर अश्वनी चोपड़ा व मंचासीन सभी अतिथियों ने खड़े होकर स्वागत किया। फतेहाबाद से लगभग 300 महिलाएं सम्मेलन में पहुंची। सम्मेलन को सफल बनाने में फतेहाबाद के निजी स्कूलों के अलावा संयोजक विजय निमोüही, शैलेन भास्कर, राज नांरग, अशोक मक्कड़, आरके मैहता, नरेन्द्र गिल्होत्रा व काका चौधरी की अहम भूमिका रही। सम्मेलन में फतेहाबाद के कैलाश चंद्र रुखाया, डा. चिंरजीलाल महतानी, भगवान दास डूमरा, कर्म नारायण नारंग व फकीरचंद तनेजा को सम्मानित किया गया। अश्वनी चोपड़ा ने डा. चिंरजीलाल महतानी व कैलाश चंद्र के चरण छूकर आशीर्वाद लिया। श्री रुखाया ने मंच पर मुल्तानी में कविता सुनाकर जमकर वाहवाही बटोरी। पंजाबी बिरादरी की एकता को लेकर किया गया प्रथम गैर राजनीतिक सम्मेलन एकता का संदेश देने में सफल रहा।

का. पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया नही रहे

फतेहाबाद 29 सितम्बर/निस- बरसों से गरीब-मजदूर-किसानों व अन्याय के विरूद्ध लड़ाई लड़ते रहे का. पृथ्वी सिंह गोरखपुरिया आज हमारे बीच नहीं रहे। 62 वषीüय श्री गोरखपुरिया ने आज लम्बी बीमारी के बाद एम्ज में दोपहर पौने दो बजे अंतिम सांस ली। वे अपने पीछे पत्नी, मां, दो बेटे, दो बेटियां व भरा-पूरा माकपा परिवार छोड़ कर गए हैं। छात्र राजनीति से माकपा के रा’य सचिव मंडल तक पहुंचे का. पृथ्वीसिंह प्रदेश में माकपा के संस्थापक सदस्य के रूप में जाने जाते है। उन्होंने डबल एम.ए. किया मगर रोजगार को मौलिक अधिकार बनाने की मांग को लेकर कुरूक्षेत्र में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल के सामने अपनी डिगि्रयां फाड़ कर काफी चर्चा बटोरी। आपातकाल के दौरान वे 19 माह तक जेल में रहे। वर्ष 1972 में उन्होंने बडोपल से, 1977 में ताऊ देवीलाल के सामने भट्टू से तथा 1987, 91 व 96 में उन्होंने फतेहाबाद से चुनाव लड़ा। वे हमेशा कहते थे कि `सत्ता में पहुंचना ही बड़ी बात नहीं है, विपक्ष को मिले वोट भी अपना महत्व रखते हैं।´ पार्टी जिला कमेटी की तरफ से आज का. रामकुमार बहबलपुरिया के नेतृत्व में मौन रखकर उन्हें श्रद्धाजंलि दी गई। श्री गोरखपुरिया का अंतिम संस्कार कल सुबह 12 बजे गांव गोरखपुर में होगा।